Comet C/2025 R3 (PanSTARRS) and the Artificial Intruder
Comet C/2025 R3 (PanSTARRS) and the Artificial Intruder
On the morning of April 14, 2026, our team at Kosmikai successfully captured Comet C/2025 R3 from Himalaya Darshan, Nainital. We arrived at the site around 3:30 AM, equipped with the Kosmikai telescope, DSLRs, and smartphones, while also conducting visual observations through binoculars.
According to COBS, the comet currently sits at a magnitude of 4.4. While it is only faintly visible to the naked eye, a good pair of binoculars clearly reveals its distinct green glow. Despite the challenge of an 11% waning crescent moon rising alongside the comet and brightening the sky, we managed to secure several frames.
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As sunrise approached and the comet began to fade into the morning light, I took a few final shots by attaching my DSLR to the telescope. The most difficult part was locating a non-visible object at a 1200mm focal length; at that magnification, the field of view is roughly the size of the Moon, making it incredibly hard to find an object invisible to the eye. It felt like searching for a specific star through a very long, narrow tube. Fortunately, we were able to track it manually. Although the high ISO settings resulted in some noise, post-processing helped make the images presentable.
One striking observation was the sheer number of satellites—hundreds of them—streaking across the sky. This significantly complicates astrophotography and raises a serious concern: the rapid advancement of commercial space missions and tourism is hampering our ability to view the cosmos from Earth.
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In this image, you can see the comet's green coma next to a bright streak of light—an artificial satellite crossing our narrow field of view. Capturing this intersection between a satellite and a comet with an orbital period of nearly 170,000 years is a rare, if bittersweet, moment. These satellites disrupt Earth-based observations for both amateur astronomers and the global scientific community.
With startups like Reflect Orbital planning to deploy 50,000 giant space mirrors to illuminate Earth at night, the preservation of our dark skies is at a critical crossroads. I hope we can continue to enjoy the natural beauty of the night sky before it becomes permanently too bright.
धूमकेतु C/2025 R3 (PanSTARRS) और कृत्रिम घुसपैठिया
14 अप्रैल 2026 की सुबह, 'कॉस्मिकई' (Kosmikai) की हमारी टीम ने हिमालय दर्शन, नैनीताल से धूमकेतु C/2025 R3 को सफलतापूर्वक कैमरे में कैद किया। हम सुबह करीब 3:30 बजे वहां पहुंचे। हमारे पास कॉस्मिकई टेलिस्कोप, DSLR और स्मार्टफोन थे, साथ ही हमने दूरबीन (binoculars) के जरिए भी इसका अवलोकन किया।
COBS के अनुसार, वर्तमान में इस धूमकेतु की चमक (magnitude) लगभग 4.4 है। हालांकि यह नग्न आंखों से केवल धुंधला ही दिखाई देता है, लेकिन एक अच्छी दूरबीन से इसकी स्पष्ट हरी चमक को आसानी से देखा जा सकता है। 11% घटते हुए चंद्रमा (waning crescent moon) के धूमकेतु के साथ उदय होने और आसमान में उसकी रोशनी फैलने की चुनौती के बावजूद, हम इसकी कुछ तस्वीरें लेने में सफल रहे।
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जैसे-जैसे सूर्योदय करीब आया और धूमकेतु सुबह की रोशनी में ओझल होने लगा, मैंने अपने DSLR को टेलिस्कोप से जोड़कर कुछ अंतिम शॉट्स लिए। सबसे कठिन काम 1200mm की फोकल लेंथ पर एक ऐसी वस्तु को खोजना था जो आंखों से दिखाई नहीं दे रही थी। इतनी अधिक मैग्निफिकेशन पर 'फील्ड ऑफ व्यू' (दृश्य क्षेत्र) लगभग चंद्रमा के आकार के बराबर ही होता है, जिससे किसी अदृश्य वस्तु को ढूंढना बेहद मुश्किल हो जाता है। यह एक लंबी और संकरी नली के जरिए किसी विशेष तारे को खोजने जैसा था। सौभाग्य से, हम इसे मैन्युअल रूप से ट्रैक करने में सफल रहे। हालांकि हाई ISO सेटिंग्स के कारण तस्वीरों में कुछ 'नॉइज़' (noise) थी, लेकिन सॉफ्टवेयर में पोस्ट-प्रोसेसिंग के बाद वे साझा करने योग्य बन गईं।
एक चौंकाने वाला अनुभव यह था कि आसमान में सैकड़ों उपग्रह (satellites) गुजर रहे थे। यह खगोल फोटोग्राफी (astrophotography) को बहुत जटिल बना देता है और एक गंभीर चिंता पैदा करता है: वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशनों और अंतरिक्ष पर्यटन की बढ़ती होड़ पृथ्वी से ब्रह्मांड को निहारने की हमारी क्षमता को बाधित कर रही है।
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इस तस्वीर में आप धूमकेतु की हरी चमक (green coma) के बगल में प्रकाश की एक लकीर देख सकते हैं—यह और कुछ नहीं बल्कि हमारे संकीर्ण दृश्य क्षेत्र को पार करता हुआ एक कृत्रिम उपग्रह है। लगभग 1,70,000 वर्षों की कक्षीय अवधि वाले दुर्लभ धूमकेतु और एक उपग्रह के इस मिलन को कैद करना एक अनोखा, लेकिन थोड़ा दुखद क्षण है। ये उपग्रह न केवल हमारे जैसे शौकिया खगोलविदों के लिए, बल्कि वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी पृथ्वी-आधारित अवलोकनों में बड़ी बाधा बन रहे हैं।
'रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल' (Reflect Orbital) जैसे स्टार्टअप्स, जो रात में पृथ्वी के कुछ हिस्सों को रोशन करने के लिए अंतरिक्ष में 50,000 विशाल दर्पण तैनात करने की योजना बना रहे हैं, हमारे 'डार्क स्काई' (dark sky) के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा हैं। उम्मीद है कि हम रात के आकाश की इस प्राकृतिक सुंदरता का आनंद तब तक ले पाएंगे, जब तक कि यह कृत्रिम रोशनी से पूरी तरह धुंधला न हो जाए।
धूमकेतु C/2025 R3 (PanSTARRS) और बनावटी (कृत्रिम) घुसपैठिया क जानकारी कुमाऊँनी भाषा में तल दियैं छ:
14 अप्रैल 2026 क रात्त्तै (morning), 'कॉस्मकई' (Kosmikai) की हमार टीम ले हिमालय दर्शन, नैनीताल बटी धूमकेतु C/2025 R3 कैं सफलतापूर्वक कैमरे में कैद करी. हम रात्त्तै लगभग 3:30 बजे उतला पुकज गयां. हमार दगड़ कॉस्मकई टेलिस्कोप, DSLR और स्मार्टफोन छी, और हमुल दूरबीन (binoculars) क जररये ले यकै दखेण-परखण करी.
COBS क अनसुार, आल्ले ईं धूमकेतुक चमक (magnitude) लगभग 4.4 छु. चाह ेयो आँखन ले कवेल धुंधुल देखिंछ, पण एक भल दूरबीन ले यकै साफ हरी चमक आसानी ले देखि सकिंछ. 11% र्टद जून (waning crescent moon) क धूमकेतु क दगड़ ऊण और आगास में ऊईं उजालो फैकण क चनुौती क बावजदू लै, हम यकै कुछ फोटो खींचण में सफल रयां.
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जस्यां-जस्यां सूरज ऊण क बखत पास आयो और धूमकेतु रात्त्तै क उजालो में ओझल हुण लागो, मैंल आपण DSLR कैं टेलिस्कोप दगड़ जोड़ बेर कुछ आखरी फोटो खींची. सबसे ककठन (difficult) काम 1200mm क फोकल लेंथ पर ककसी यैसी वस्त ुकैं खोजण छी जो आँखन ले नि देखिण छी. इतुक ज्यादा मैग्नीफिकेशन पर 'फील्ड ऑफ व्यू' (दृश्य क्षेत्र) कवेल जून क आकार क बराबर ऊंछ, जै ले ककसी अनदखेी वस्त ुकैं खोजण भौत मकु्शकल है जांछ. यो एक लम्प्बी और कँकुड़ी (narrow) नली क जररये ककसी खास तारे कैं खोजण जैस छी. भल भयो कक हम यकै आपण हाथन ले (manually) ट्रैक करण में सफल रयां. चाह ेISO ज्यादा हुणक वजह ले फोटोन में कुछ 'नॉइज़' (noise) छी, पण सॉफ्टवेयर में काम करण क बाद ऊँ साझा करण लायक बकण गई।
एक अचरज करणी बात यो छी कक आगास (sky) में सैकड़ों उपग्रह (satellites) जांण रया छी. यो खगोल फोटोग्राफी कैं भौत मकु्शकल बणै दलेो और एक ठुल कचंता पैदा करंुछ: व्यापाररक अंतरिक्ष कमशन और अंतरिक्ष पर्यटन क बढ़दी होड़ धरती बटी ब्रह्माण्ड कैं देखण क हमार हकमत कैं रोकण रई छ.
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ईं फोटो में तुम धूमकेतुक हरी चमक (green coma) क ककनार उजालो क एक लकीर देखि सकछा—यो क्ये लै नि, बस हमार कँकुड़ी नजर कैं पार करंुछ एक बनावटी उपग्रह छु. लगभग 1,70,000 सालन क परिक्रमा बखत वाल ईं दुर्लभ धूमकेतु और एक उपग्रह क यो कमलन एक अनठूो, पण थोड़ा दखुी (sad) कदन (moment) छु. ये उपग्रह नि कवेल हमार जैस खगोल प्रेममयन क लीजी, पण वैज्ञानकन क लीजी लै अगास देखण में ठुल बाधा बणण रयां छन.
'रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल' (Reflect Orbital) जैस स्टार्टअप, जो रात में धरतीक कुछ हिस्सां कैं चमकुण क लीजी अंतरिक्ष में 50,000 ठुल ऐण (mirrors) लगुाण क योजना बणाण रयां छन, हमार 'डार्क स्काई' क लीजी ठुल खतरो छन. आस छ कक हम रात क अगास क ईं प्राकृकतक सदुरंता क आनंद तब तक ले सकूं, जब तक यो बनावटी उजालो ले परूी तरह धुंधुल नि है जा.

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